बालारिष्ट समीक्षा
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ज्योतिष शास्त्र को आचार्यों ने काल का विधायक शास्त्र कहा है। काल पर प्रभावी होने के कारण अनादिकाल से ज्योतिष शास्त्र सम्पूर्ण जड़-चेतन जगत पर समग्र रूप से प्रभावशाली है।
प्राचीन काल में ज्योतिष शास्त्र का क्षेत्र अत्यन्त सीमित था, इसका उपयोग केवल वेद विहित यज्ञों को सम्पादनार्थ उचित-अनुचित काल जानने के लिए किया जाता था। किन्तु कालान्तर में ज्योतिष के अठ्ठारह प्रवर्तक ऋषियों एवं आचार्यों के द्वारा इसका विस्तार किया गया। उन्होंने इस शास्त्र को ‘‘सिद्धान्त, संहिता व होरा’’ नामक तीन स्कन्धों में विभाजित किया। इन्हीं तीन स्कन्धों पर हो रहे निरन्तर शोधों के कारण वर्तमान में ज्योतिष शास्त्र ‘‘जातक, ताजिक, प्रश्न, स्वप्न, शकुन, सामुद्रिक, मुहूर्त, स्वर, वास्तु’’ आदि बहुस्कन्धात्मक के रुप में सुविख्यात हो गया है।
ज्योतिष शास्त्र का जातक विभाग व्यावहारिक जगत के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इस विभाग में जन्म-पत्रिका, वर्ष-पत्रिका, प्रश्न कुण्डली के आधार पर खगोलीय पिंडों और पृथ्वी पर स्थित मानव जीवन के बीच संबंधों का अध्ययन किया जाता है। तथा मानव जीवन में घटित होने वाले शुभाशुभ एवं घटित होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान किया जाता है।